बगावती

                     “मैं सिनेमा जा रही हूं,”गली के नुक्कड़ पर उस बुद्धवार जैसे ही मां अपने झोलों के साथ प्रकट हुईं,अपनी साइकल पर सवार हो कर अगले ही पल मैं उन के पास पहुंच ली।                      हर बुद्धवार को मेरा सिनेमा देखना लगभग तय रहता।                      हमारे कस्बापुर के तीनों हाल उस दिन अपने मैटिनी शो को लेडीज़ शो के रूप में आयोजित करते और टिकट भी आधे दाम पर रखते।