विश्वांजलीलेखक राज फुलवरे---प्रस्तावनायह कथा किसी एक स्त्री की नहीं है। यह कथा उन असंख्य सूनी गोदों की है, जिनमें प्रार्थना पलती है। यह कथा उस त्याग की है, जो नाम नहीं माँगता, और उस करुणा की है, जो प्रतिफल नहीं चाहती।यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है, पर इसके भाव, इसकी पीड़ा और इसका प्रकाश— सत्य से भी अधिक सजीव हैं।---अध्याय 1 : देवाघर की दिव्य ज्योतिदेवाघर…यह कोई साधारण स्थान नहीं था। यहाँ समय ठहर जाता था, और मौन बोलने लगता था। यहाँ हवा जब बहती, तो उसमें मंत्रों की गूँज होती। दीपक बिना हाथ लगाए जल उठते, और घंटियों के स्वर