बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही ठहरकर बरस रही थी, जैसे शहर को नहीं—अन्वी के दिल को भिगोना चाहती हो।कॉफ़ी हाउस की खिड़की के पास वही पुरानी टेबल…जहाँ कभी दो कप चाय,और अनगिनत सपने रखे जाते थे, अन्वी पिछले छह सालों से जब वो कॉलेज में थी तब से वो किसी खास इंसान जो दोस्त से बढ़कर था उसके साथ यहां आया करती है और यह सिलसिला जारी है दोस्ती और वो खास दोस्त पीछे छूट गए लेकिन अन्वी अपने पुरानी यादों को ताजा करने या उस खास दोस्त के इंतजार में अन्वी ने अपनी शॉल ठीक की और घड़ी