श्रापित एक प्रेम कहानी - 36

कुंम्भन का नाम सुनकर सब घबरा जाता है। और डर से इधर उधर देखने लगता है। एकांश घबराते हुए कहता है---->" क...कक....कहा वर्शाली ? मुझे तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। तब वर्शाली कहती है--->" एकांश जी वो देखिये मेले के बिच में वो सुखा पेड़ दिख रहा है। सभी उसी पेड़ को देखने लगता है पर कुछ दिखाई नहीं देता। आलोक कहता है--->" पर वहाँ तो कुछ दिखाई नहीं देता। वर्शाली कहती हैं--->" ध्यान से देखीए एकांश जी पेड़ के उस सुखी टहनी पर जो सिधे ऊपर की और गई है। उसी पर देखीए कुम्भन की आंखें दिखाई देगी आपको। जो उस पैड़ पर