पतंगों से लालटेन तक

14 जनवरी की सुबह जयपुर में कुछ अलग ही रंग लेकर आती है। ठंडी हवा में हल्की धूप, छतों पर चढ़ते लोगों की चहल-पहल, और आसमान में पहले से तनी हुई डोरें—मानो शहर ने खुद को त्योहार के लिए तैयार कर लिया हो। मकर संक्रांति का दिन था। हर छत से “वो काटा… वो काटा!” की आवाज़ें गूंज रही थीं। नीली, लाल, पीली पतंगें आसमान में ऐसे तैर रही थीं जैसे जयपुर का दिल खुलकर मुस्कुरा रहा हो। अमन अपनी छत पर खड़ा था। हाथ में चरखी, आँखें आसमान पर टिकी हुईं। पास ही उसकी माँ तिल के लड्डू बना