________________________ लगता है सब कुछ व्यर्थ है।क्योंकि सभी तरफ झूठ जीत रहा और सच हार रहा। सोशल साइट्स पर आप नहीं हैं तो मानो आपका अस्तित्व ही दुनिया में नहीं है। नहीं हूं मैं टेक्नोसेवी तो क्या मेरे सुख दुख,यार दोस्त, परिचित नहीं होंगे? लेकिन कुछ नहीं हुआ।अकेले घूमना,अकेले ही आना जाना होता रहा और कुछ महीने में ही मैं एकांतप्रिय बना दिया गया तकदीर के हाथों। क्या इंसान कुछ बदल सकता है या फिर सब कुछ पूर्व निर्धारित है?उस ऊपर वाले के हाथों? कुछ धन राशि इक्कठी हो गई थी तो यात्रा का