---शीर्षक: यादों के रंगलेखक: विजय शर्मा एरी---शहर के सबसे पुराने मोहल्ले की एक तंग-सी गली में स्थित था वर्मा स्टूडियो। लकड़ी का जर्जर बोर्ड, जिस पर कभी सुनहरे अक्षरों में लिखा था— फोटोग्राफी हर पल को अमर बनाती है—अब धुंधला पड़ चुका था। इसी स्टूडियो के भीतर, एक कोने में बैठे थे अर्जुन वर्मा, जिनकी आँखों में उम्र से ज़्यादा यादों की सिलवटें थीं।अर्जुन आज भी वही पुराना कैमरा संभाले बैठे थे—ब्लैक एंड व्हाइट ज़माने का कैमरा। दुनिया रंगीन हो चुकी थी, लेकिन अर्जुन की दुनिया अब भी यादों के श्वेत-श्याम फ्रेम में कैद थी।आज सुबह ही पोस्टमैन एक पुराना