रंगीन तस्वीरेंलेखक: विजय शर्मा एरीशहर की उस तंग-सी गली में एक पुरानी-सी फोटो स्टूडियो थी—नाम था “रंगीन तस्वीरें”। बाहर से देखने पर वह स्टूडियो किसी बीते ज़माने की कहानी लगता था। शीशे पर चिपकी धूल, लकड़ी का जर्जर दरवाज़ा, और अंदर से आती कैमरे की क्लिक—सब कुछ जैसे समय के किसी और पन्ने से उधार लिया गया हो। मगर जो भी एक बार भीतर कदम रखता, उसे महसूस होता कि यह जगह सिर्फ तस्वीरें नहीं, ज़िंदगी के रंग सहेजती है।स्टूडियो के मालिक थे राघव वर्मा—पचपन की उम्र, आँखों में ठहराव और चेहरे पर ऐसी मुस्कान जैसे हर दर्द को देख-समझकर