कहानी मेरी है… मैं एक पेन हूँ… जी हाँ, आपने सही पढ़ा है… इंग्लिश में कहें तो पेन, उर्दू में कहें तो क़लम, और भी भाषाओं में मुझे अलग नामों से बुलाया जाता होगा, पर मतलब सबका एक ही निकलता है—पेन या क़लम… मेरी ज़िंदगी बहुत ही अलग है, मैं हर किसी के काम आता हूँ—बच्चे, जवान, पढ़े‑लिखे, बिज़नेस मैन, और तो और मोहल्ले की किराने की दुकान पर भी मेरा बड़ा दबदबा है… हाँ जी, ये मैंने इसलिए कहा क्योंकि सबकी उधारी तो वो मुझसे ही लिखता है, कितना कलेक्शन कहाँ से करना है, सारे पैसे का