घूरा पर उगा पौधा..?

शरीर पर लगे घाव तो भरने के लिए ही होते हैं,किंतु मन पर लगे घाव शरीर को भीतर से खोखला कर देते हैं।यही कारण है कि मन के घाव, सतही घावों को भरने नहीं देते।खोखला शरीर, शिथिल मन और दर्द से कराहती हृदय-भित्तियाँ–इन्हीं के साथ एक दिन व्यक्ति चुपचाप दम तोड़ देता है।यह कहानी है हम सबके बीच स्थित नव्या की।बीते वर्ष से उसने ही अपने घर की बागडोर संभाल रखी है।पैरो तले मातृत्व के जमीन का खिसक जाना,शांति और सुकून से भरे आलिंगन का इस विपत्त भरे समय में छिन जाना...आसान कहां है किसी व्यक्ति के लिए।पर हृदय की