तलाश मातृत्व की कैरियरिस्ट वूमनिया मे

[ नीलम कुलश्रेष्ठ  ] नारी आंदोलन ,स्त्री समानता ,नारी विमर्श ,स्त्री के अधिकार , इन सबकी विभिन्न कलाओं से अभिव्यक्ति, अपना व्यवसाय  के अलावा होता है` स्त्रियों की अपने घर परिवार में उनकी अहम भूमिका`। मेरे अभिमत के अनुसार कोई वाद ,कोई विमर्श ,कोई आंदोलन न उसे बदल सकता ,न मातृत्व या ग्रहणी  के रोल का कोई पर्याय है जो उसके महत्व व उपयोगिता  को कम कर सके । ये बात हर समझदार स्त्री समझती है चाहे उसे दोयम दर्ज़े का नागरिक समझा जाये, चाहे घर पर पड़ी  चीज़। स्त्रियां पीढ़ी दर पीढ़ी इस रोल को निबाहती आ रहीं  हैं।