उजाले की ओर –संस्मरण

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    स्नेहिल नमस्कार मित्रो            जीवन बड़ा ही अद्भुत् है न ही पूर्ण रूप सै स्पष्ट, न ही अस्पष्ट! मनुष्य उसमें घूमता ही तो रह जाता है। हम एक स्थान से अनेक प्रयत्नों के बाद निकलते हैं तो पता भी नहीं चलता कब दूसरे अनजाने मोड़ पर जा अटकते हैं!यह हम सबने अवश्य अनुभव किया होगा कि  जीवन में एक द्वार बंद होता है तो ईश्वर हमारे लिए दूसरा द्वार खोल देते हैं। बस हमें अपनी पूरी ताकत से अपने प्रयास को करते रहना होता है। आप सबके साथ एक घटना साझा करती हूँ। जब