अध्याय 47, XLVII1 और अब हे मेरे बालको, अपने अपने मन में विचार करो, और अपने पिता के वचनोंको जो भगवान के मुंह से तुम्हारे पास पहुंचे हैं, भलीभांति स्मरण रखो। 2 अपने पिता की लिखावट की ये पुस्तकें लो और पढ़ो। 3 क्योंकि बहुत सी पुस्तकें हैं, और उन से तुम भगवान के सब काम पाओगे, जो सृष्टी के आरम्भ से होते आए हैं, और अन्त तक बने रहेंगे। 4 और यदि तुम मेरी लिखावट पर ध्यान दोगे, तो भगवान के विरूद्ध पाप न करोगे; क्योंकि प्रभु को छोड़ और कोई नहीं है, न स्वर्ग में, न पृय्वी में,