अध्याय 32, XXXII1 मैंने उस से कहा, तू तो पृय्वी है, और जिस पृय्वी में मैंने तुझे पहुंचाया उसी में तू जाएगा; और मैं तुझे नाश न करूंगा, परन्तु जहां से मैंने तुझे निकाला वहीं भेज दूंगा। 2 तब मैं अपनी दूसरी उपस्थिति में फिर तुम्हें ग्रहण कर सकूंगा। 3 और मैंने अपने सब प्राणियों को जो दृश्य (भौतिक) और अदृश्य (आध्यात्मिक) आशीर्वाद दिया । और आदम साढ़े पांच घंटे स्वर्ग में था । 4 और मैंने सातवें दिन को अर्थात विश्रामदिन को आशीष दी, जिस दिन उस ने अपने सब कामों से विश्राम किया। अध्याय 33, XXXIII1 और मैंने