"कुछ बोझ कंधों पर नहीं, आत्मा पर होते हैं। और वो बोझ तब तक हल्के नहीं होते जब तक इंसान खुद को खो न दे।" रात 11:49 — उज्जैन जंक्शन। प्लेटफॉर्म की सबसे अंतिम बेंच पर एक लड़का बैठा था। उसके चेहरे पर गहराई थी — जैसे किसी ने वर्षों से मुस्कुराना छोड़ दिया हो। उसके पास न कोई सूटकेस था, न कोई टिकट, सिर्फ एक पुराना बैग, कुछ नोट्स, और एक अधूरी डायरी। सुनील के लिए UPSC सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी, वो एक वादा था — खुद से, अपने परिवार से, और उस समाज से