खोया सम्मान

  • 381
  • 117

खोया सम्मानएक भावनात्मक हिंदी कहानीलेखक: विजय शर्मा एरी---कहते हैं—इंसान सब कुछ खो सकता है, पैसा, पद, रिश्ते… लेकिन अगर उसने अपना सम्मान खो दिया, तो वह भीतर से खाली हो जाता है। यही कहानी है रघुनाथ शर्मा की—एक ऐसे व्यक्ति की, जिसने जीवन की भागदौड़ में वह सब पा लिया, जो बाहर से चमकता है, पर भीतर कहीं अपना सबसे कीमती खज़ाना खो बैठा।रघुनाथ शर्मा कभी अपने मोहल्ले की शान हुआ करता था। सरकारी दफ्तर में ऊँचे पद पर, सादा जीवन, ईमानदार छवि। लोग कहते थे—“शर्मा जी हों तो काम अपने आप हो जाता है।” उनकी पत्नी सावित्री उन्हें देवता