कुंती का खेल

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                  कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था।                   टंडन मेम साहब उस समय अपने ग्राहकों के साथ गोल कमरे बनाम अपनी आर्ट गैलेरी में रहीं और कुंती गोल कमरे के उपकक्ष में।                   दिन में दीर्घावधि के लिए जब भी बेबी सोती, टंडन मेम साहब कुंती को अपने गोल कमरे के उपकक्ष में बुला लेतीं। अपनी आर्ट गैलेरी के कच्चे माल को उस के हाथों चमकाने-दमकाने।