हनुमान का रोमंथन एवं मानसिक ताप

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हनुमान का रोमंथन एवं मानसिक ताप   गंगा के उत्समुख गंगोत्री के समीप एक विशाल विस्तृत शिलाखंड के ऊपर अधोवदन उपवेशन करके महाबली चिरंजीवी हनुमान विषण्णवदन रोमंथन कर रहे थे – उनके जन्मग्रहण के पश्चात् कितने सहस्र वर्ष व्यतीत हो गये हैं, इस धराधाम में कितनी कुछ घटित हो गयी है, कितने राजा-महाराजा-सम्राटों का उत्थान-पतन हुआ है, कितने दुर्योगों में प्राणीसमूह विपन्न हुआ है, सत्ता की लालच में कितने युद्ध-विग्रह घटित हुए हैं, उन्होंने सब कुछ स्वयं आंखों से देखा है। चिरंजीवी होने के वरप्राप्ति में वे यौवनारम्भ में उल्लसित हो गये थे, किन्तु श्रीरामचन्द्र के जीवनावसान के पश्चात् तथा