खेतों के बीच से गुजरती वह कच्ची राह, जहाँ लाजो अक्सर अपनी सहेलियों के साथ पानी भरने जाती थी। सावन का उसे दूर से देखना और लाजो का अपनी ओढ़नी के पल्लू को उँगलियों में लपेटना।गाँव की पगडंडियों पर लाजो की पायल जब झनझनाती, तो सावन का दिल धड़क उठता। लाजो सादगी की मूरत थी—आँखों में काजल और मन में सावन के लिए अटूट विश्वास। लेकिन उनके बीच एक गहरी खाई थी: उनके परिवारों की पुरानी रंजिश। लाजो के पिता की सख्ती पूरे गाँव में मशहूर थी; उनके लिए 'मर्यादा' उनकी पगड़ी थी, जिसके आगे बेटी की खुशी का कोई