किसी से लगती हो तो मै जिम्मेदारी नहीं लेता हूँ। ये कहानी किसी पर भी लग सकती है। डलिवरी बॉय एक मोहन दास की जिंदगी के कुछ पड़ाव से निकल कर आयी हुई एक सभाधान पूरक एक छोटी कथा है।सोच कर जिस बात पे रोना आता है, भूख जिस कहानी का मकसद हो पेट की भूख, वो सपने कैसे बड़े देख सकता है। बस बेरोजगार जो एक दम से अच्छा पढ़ा लिखा हो, लेकिन वजीफा सरकार से लेता हुआ फर्स्ट रहने वाला युवक डलिवरी बॉय की जॉब करे।