हमशकललेखक राज फुलवरे शहर की शामें हमेशा भीड़, भागदौड़ और शोर से भरी होती हैं। लेकिन इसी शहर के एक कोने में दो ज़िंदगियाँ चुपचाप एक-दूसरे से टकराने वाली थीं—सुंदर और परम।दोनों की शक्ल एकदम मिलती-जुलती… जैसे किसी ने एक ही साँचे में ढालकर दो चेहरे बना दिए हों।लेकिन ज़िंदगी—दोनों की बिल्कुल अलग।---अध्याय 1 – पहली मुलाक़ातसुंदर, एक सादा-सी ज़िंदगी जीने वाला सीधा-सादा लड़का।और सामने… परम—शहर का कुख्यात विलन।जिसका नाम सुनकर ही लोग कांपते थे। उसके साथ हमेशा रहते थे उसके तीन आदमी—युवराज, सद्दाम और परम का दाहिना हाथ अब्दुल।एक दिन सुंदर को खबर लगती है कि शहर में एक ऐसा