माँ की ममता

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माँ की ममतालेखक – विजय शर्मा एरी(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)---1. एक छोटी-सी सुबह, बड़ा-सा एहसाससर्दियों की हल्की-हल्की गुनगुनाती सुबह थी। गाँव के छोटे-से घर में चूल्हा जल चुका था और रसोई से आने वाली हल्की-सी धुएँ की महक पूरे आँगन में फैल रही थी।माया चूल्हे के पास बैठी रोटियाँ सेंक रही थी। उसके माथे पर पसीना नहीं, ममता की चमक थी।सामने लकड़ी के बिस्तर पर उसका बेटा अंकुर स्कूल की किताब पकड़कर सोते-सोते जागने का नाटक कर रहा था।“उठ जा बेटा, देर हो जाएगी,” माया प्यार से बोली।अंकुर आँखें मलते हुए बोला, “माँ… पाँच मिनट बस…”माया ने मुस्कुराकर उसका