इस घर में प्यार मना है…क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा।या शायद…क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है।अध्याय 1— एक अनचाही शादी“संस्कृति… तैयार हो जाओ।”माँ की आवाज़ कानों में पड़ी, लेकिन संस्कृति का ध्यान आईने में दिख रही अपनी ही परछाईं पर अटका था। लाल जोड़ा, भारी गहने और आँखों में वो डर… जो किसी दुल्हन का नहीं होता।आज उसकी शादी थी। कार्तिक रघुवंशी से।एक ऐसा नाम… जिसे सुनते ही पूरे शहर में खामोशी छा जाती थी।संस्कृति ने धीरे से खुद से पूछा—“क्या शादी के बाद ज़िंदगी शुरू होती है… या यहीं खत्म