श्री कृष्ण 3.0 : वर्ष 3025 वर्ष 3025…यह वही पृथ्वी थी, लेकिन वैसी नहीं जैसी कभी हुआ करती थी। नदियाँ अब डेटा लाइनों में बदल चुकी थीं, जंगल वर्चुअल पार्क बन गए थे और इंसान का सबसे बड़ा रिश्ता अब दिल से नहीं, बल्कि स्क्रीन से था। मानव जीवन को अब मशीनें नियंत्रित करती थीं—सोच, भावना, निर्णय—सब कुछ।इस युग को कहा जाता था डिजिटल कलियुग।धर्म अब मंदिरों में नहीं, बल्कि सर्वर में कैद था। गीता, वेद, उपनिषद—सब कुछ ऑनलाइन था, लेकिन उनका अर्थ कोई नहीं समझता था। इंसान ने भगवान को मानने की जगह खुद भगवान बनने की कोशिश