खिड़की के उस पार आसमान में बादल घिर आए थे। सीमा जी किताबों से भरी अलमारी के सामने खड़ी थीं। किताबें उनके लिए केवल पन्नों पर लिखे शब्द नहीं थीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी का आईना थीं। उन्हें पढ़ाना उतना ही प्रिय था जितना किसी को सांस लेना।लेकिन जीवन हर किसी को आसान राह कहाँ देता है।हर बार एक नई शुरुआतपति के लगातार ट्रांसफर ने सीमा जी को घुमक्कड़ बना दिया था। हर चार-पाँच साल में उन्हें सामान बाँधकर नए शहर का रुख़ करना पड़ता। नया स्कूल, नई कक्षाएँ, नए सहकर्मी—सब कुछ हर बार बिल्कुल अनजान। कई बार लगता कि फिर