श्रापित एक प्रेम कहानी - 28

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एकांश हैरानी से कहता है----एकांश :- मेरा महल..? वर्शाली कहती है:- हाँ एकांश जी। आप भूल गए के अपने कैसे मुझे उन दुष्ट मानवो से रक्षा किए थे बस तभी से मेैं और ये महल आपका हो गया। एकांश वर्षाली से पुछता है---एकांश :- क्या...! वर्शाली क्या कहा तुमने। तुम भी मेरी हो गई हो। वर्शाली :- आपको क्या सुनाई दिया एकांश जी। एकांश चुप हो जाता है और कहता है---एकांश :- तुमने इतना कह दिया ये मेरे लिए बहुत है वर्षाली । पर मैं यहां चाह कर भी नहीं रुक सकता। क्योंकी तुम एक लड़की हो और मैं एक लड़का अगर किसी को