लेकिन मैं भरतपुर ज्वाइन नहीं कर सका।मेरा पुलिस सत्यापन का फॉर्म नहीं भरा गया था। इसलिए मुझे वापस बांदीकुई आना पड़ा। और करीब तीन महीने लग गए जब मेरे पुलिस सत्यापन के कागज आए। मेरे ताऊजी कन्हैया लाल जो बांदीकुई से मेल ड्राइवर से रिटायर हुए थे। पुलिस थाने जाकर पता करते रहते और फिर अक्टूबर में जब पुलिस सत्यापन हो गया तब कोटा से मेरे पास पत्र आया। उस समय मेरे बहनोई जय भगवान गॉड बांदीकुई में ही टिकट कलेक्टर थे। और बांदीकुई के एस एस ऑफिस से मुझे कोटा के लिए पास मिला। उन दिनों सीधा रास्ता नहीं था।