सपनों की तरह शांत सुबह थी। दीपिका अपनी बालकनी में खड़ी चाय पी रही थी। दूर तक फैले पुराने स्कूल की इमारत पर उसकी नजरें टिक गईं। आज वही स्कूल फिर से खुलने वाला था।“क्या मैं फिर से वही भीड़ में खुद को खो दूँगी?” दीपिका ने दिल में सोचा।जैसे ही उसने कदम बढ़ाया, उसकी नजर एक लड़के पर पड़ी। वही लड़का जिसने 5 साल पहले उसकी जिंदगी बदल दी थी।वो लड़का – आरव।दीपिका की धड़कन तेज हो गई। “तुम यहीं हो?” उसकी आवाज़ कांप रही थी।आरव मुस्कुराया, लेकिन उसकी आँखों में दर्द झलक रहा था।“दीपिका… मैं…” वह बीच में