देवर जी घर पर हैं

शर्मा परिवार शहर के एक शांत से मोहल्ले में रहता था। घर में ज़्यादा शोर-शराबा नहीं था, सब कुछ समय पर चलता था। सुबह 7 बजे चाय, 9 बजे ऑफिस, 10 बजे घर में सन्नाटा।घर के सदस्य थे—रमेश शर्मा – सख़्त लेकिन दिल के अच्छेसुनीता जी – हर किसी की फिक्र करने वाली माँअमित – बड़ा बेटा, ऑफिस और मोबाइल का गुलामनेहा – अमित की पत्नी, समझदार लेकिन अनुशासन पसंदसब कुछ बिल्कुल ठीक चल रहा था…जब तक एक दिन दरवाज़े पर ज़ोर से बेल नहीं बजी। देवर जी की एंट्रीदरवाज़ा खोला तो सामने खड़ा था एक मुस्कुराता हुआ लड़का—कंधे पर