नमस्कार मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।अपनी कुछ बातों को आप सबके सामने रखना आई हूंँ।मेरे हमसफ़र जब तुम मेरे साथ होते हो, नज़ारा कुछ अलग होता है जब मेरे क़दम से क़दम तुम मिलते हो,मैं अलग हीं दुनिया में होती हूँ ऐसा लगता है मनो धरती पर जन्नत हो, ऐसा कोई कठिन काम जो मैं कर ना सकूं। तुम्हारे दिल में रहती हूंँ तुम मेरे दिल की धड़कनों में तराने जब बजाते हो। कभी मेरी जुल्फों को ठीक करते हो तो कभी मेरे आंँचल हवा झोंका दते हो।तुम होत तो मैं हूंँ , मेरी सांसे चलती हैं मैं ख़ुश