भगवत गीता जीवन अमृत

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प्रश्न 1: बार-बार असफलता क्यों मिलती है?कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन — भगवद गीता 2.47️ फल नहीं, कर्म पर ध्यान दो।जीवन में असफलता का अनुभव लगभग हर व्यक्ति करता है। कोई परीक्षा में पिछड़ जाता है, कोई व्यापार में घाटा झेलता है, तो कोई संबंधों में टूटन महसूस करता है। बार-बार असफलता मिलने पर मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है—“मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?” इस प्रश्न का उत्तर बाहरी परिस्थितियों में कम, और हमारी दृष्टि, धैर्य तथा कर्म-भावना में अधिक छिपा होता है।भगवद गीता का यह श्लोक—कर्मण्येवाधिकारस्ते—जीवन का एक गहरा सिद्धांत सिखाता है। श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं