वेदान्त 2.0 - भाग 23

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.  प्रस्तावना · Vedanta 2.0 भाग 23, अध्याय 32 ज्ञान नहीं — दृष्टि बदलने का आमंत्रण Vedanta 2.0 मनुष्य के मन, धर्म, सत्य और जीवन की जड़ों को नई रोशनी में देखने का प्रयास है।यह न कोई नया शास्त्र है, न नया मत।यह उसी प्राचीन सत्य की आधुनिक व्याख्या है जो वेद, उपनिषद, गीता और महापुरुषों की वाणी में निरंतर प्रवाहित होता रहा है। पशु भूख के लिए लड़ता है और तृप्त होते ही शांत हो जाता है।मनुष्य भूख के लिए नहीं — मांग के लिए लड़ता है।उसका संघर्ष प्राकृतिक नहीं, मानसिक है।उसका धर्म सत्य नहीं, व्यापार बन गया है। Vedanta 2.0 का