उजाले की ओर –संस्मरण

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उजाले की ओर..... संस्मरण =================== स्नेहिल नमस्कार मित्रों      कभी कहीं कुछ पढा था जिसने सोचने के लिए बाध्य. किया।      कभी सूरदास ने एक स्वप्न देखा था, कि रुक्मिणी और राधिका मिली हैं और एक दूजे पर निछावर हुई जा रही हैं।        कैसा होगा वह क्षण जब दोनों ठकुरानियाँ मिली होंगी। दोनों ने प्रेम किया था। एक ने बालक कन्हैया से, दूसरे ने राजनीतिज्ञ कृष्ण से। एक को अपनी मनमोहक बातों के जाल में फँसा लेने वाला कन्हैया मिला था, और दूसरे को मिले थे सुदर्शन चक्र धारी, महायोद्धा कृष्ण।       कृष्ण