वेदान्त 2.0 - भाग 21

. वेदांत 2.0 भाग 21 अध्याय 30भूमिकायह अध्याय मानव संबंधों के उन अदृश्य सत्यों को खोलता हैजिन्हें हम आँखों से नहीं देपुरुष का स्त्री से भय,स्त्री का अपना स्वभाव खो देना,अमीर–गरीब का भ्रम,छोटा–बड़ा होने का अहंकार,और वह प्रेम जो इन सब सीमाओं को मिटा देता है।भूमिका का उद्देश्य बस इतना हैकि पाठक आगे की पंक्तियाँ उसी दृष्टि से पढ़ सकेजिससे यह अध्याय लिखा गया है—दृष्टि जो मन के भेदों को नहीं,अस्तित्व की एकता को देखती है।यह अध्याय बताता है किप्रकृति में छोटा–बड़ा कुछ नहीं,सब परिवर्तनशील है;और प्रेम वह शक्ति हैजो हीनता को गौरव में बदल देती हैऔर समानता की प्रतिस्पर्धा नहीं,पूरकता