आन्या कमरे में थी । आन्या ने रेड कलर का लहंगा पहना हुआ था ममता जी उसै तैयार करते हुए नम आंखों से बोली,,,,बैटा हमे माफ तो कर दोगी ना।। आन्या ए सूनकर मासूमियत से बोली,,, आप ने मेरा प्यार समझा मूझे समझा है मां और माफी क्यूं मांग रही है मूझे आपसे कोई भी शिकायत नही है।।। कूछ देर बाद अभिमान आन्या दोनों ही पाठ पर बैठे हूए थे।। सरस्वती जी ने आन्या के सर पर चूनरी ओढ़ाई । आन्या के आंखें नमः हो गई।। अभिमान आन्या के चेहरे को देख रहा था उसे यकीन नही हो रहा था आन्या उसकी होने