श्रापित एक प्रेम कहानी - 26

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वर्शाली एकांश की आंखों में अपने लिए प्रेम देख पा रही थी। वर्शाली एक टक नजर से एकांश को देखे ही जा रही थी। तभी एकांश वर्शाली से कहता है-----एकांश :- क्या हुआ वर्शाल बताओ ना..? क्या प्रेम जात पात देख कर किया जाता है। वर्शाली एकांश के आंखों में दैख कर कहती है---वर्शाली: - नहीं एकांश जी। प्रेम की कोई सीमा नहीं होती और नाहीं ही जात पात का प्रेम किसी से भी हो सकता है बस प्रेम निस्वार्थ होना चाहिए। इतना बोलकर एकांश और वर्शाली एक दसरे के आंखों में देखने लगता है। और ऐसे ही एक दुसरे को दैखते रहता है ।उधर राजनगर