श्रापित एक प्रेम कहानी - 25

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दयाल कहता है ----दयाल :- ठिक है आप लोग शांत हो जाओ मैं जाकर मलिक से कहता हूं। इतना बोलकर दयाल दक्षराज के पास चला जाता है। इधर एकांश वर्शाली से उत्सुकता से पुछता है । एकांश :- वर्शाली तुम किसी शक्ति के बारे में बोल रही थी ना। बताओ ना क्या है वो शक्ति जो तुम परियों को यहां आके मिलता है ? वर्शाली कहती है----वर्शाली : - हाँ एकांश जी बताती हूं। वर्शाली एकांश का हाथ पकड़ कर कमरे से बाहर ले कर आती है और कहती है---वर्शाली :- देखिये एकांश जी इस महल को। वर्शाली :- देखिए एकांश जी इस महल में हम