स्वयं पर नज़र: जीवन को समझने का असली मार्ग - 3

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           हमारा समाज अपने व्यक्तियों की उपलब्धियों एवं सफलता के मानकों का समय-समय पर निर्धारण करता रहता है। कुछ परिस्थितियों में ये मानता है कि समाज के नियम सर्वोपरि हैं तो अन्य में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को महत्व दिया जाता है। कहीं पर पितृसत्ता स्वीकार्य होती है तो कहीं मातृसत्ता। किन्हीं परिस्थितियों में आर्थिक उन्नति सर्वोपरि होती है तो कहीं सामाजिक प्रस्थिति। परन्तु इनमें सबसे महत्वपूर्ण क्या है ये निर्धारण कौन करेगा? एक समय था जब आर्थिक उन्नति से अधिक नैतिक उन्नति को महत्व दिया जाता था एक पुरुष कितना धन कमाता है इससे अधिक इसे महत्व