मेनका भाग 2 लेखक: राज फुलवरेअध्याय तीन — गाँव के लोग और मेनका का जालगाँव के चौपाल पर अब हर शाम मेनका का दरबार लगता था.लाल चुनरी ओढे, चंदन की खुशबू में भीगी हुई,वो ऊँचे आसन पर बैठती और उसके चारों ओर गाँववाले जुट जाते.>“ मेनका देवी, मेरे बेटे का व्यापार ठप पडा है.मेनका दीदी, मेरी बेटी की शादी में बरकत नहीं है.हर कोई उसके पास किसी न किसी उम्मीद के साथ आता.और मेनका, अपने मीठे शब्दों से सबका दर्द बाँटती.वो हर समस्या का हल बताती —कभी तावीज, कभी जल चढाने का उपाय, तो कभी“ निवेश योजना” में और धन लगाने