मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3

(1.5k)
  • 2.6k
  • 840

अगले दिन...भावना जैसे ही गेट खोलकर बरांडे में गई तो वहां का मंजर देखते ही उसका दिल जोर से धड़कने लगा,उसने आशु को आवाज लगाने की कोशिश की पर उसकी आवाज नहीं निकल रही थी फिर..भावना दौड़कर अंदर गई और आशु को उठाते हुए बोली -जल्दी उठो आशु, जल्दी बहार चलो , जल्दी चलो!!मां को इतना घबराया हुआ देखकर आशु बोला-- क्या हुआ मां  क्या बात है ?इतना क्यों घबरा रही हो ?पर.. भावना के पास कोई शब्द  नहीं थे बस इतना हीं बोली कि -पहले तुम बहार‌ चलो जल्दी से।ठीक है मां ,कहते हुए आशु आंखों को मलते हुए