गुनाहों की सजा - भाग 25

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आज माही पहले की तरह उदास नहीं लग रही थी। आज तो उसके चेहरे पर जीत की ख़ुशी और चमक अलग ही दिखाई दे रही थी। तभी माही ने अपने पिता मयंक के हाथों में मकान की फाइल रखते हुए कहा, "पापा, यह लीजिए आपकी अमानत।" मयंक ने फाइल की तरफ़ देखकर पूछा, "अरे, यह क्या है माही? तुम यह वापस लेकर क्यों आई हो?" माही ने पूरे विश्वास के साथ कहा, "पापा, मैं कभी भी ग़लत का साथ नहीं दूं, यह तो आपने और मम्मी ने ही सिखाया है ना? जिसके साथ वरुण जैसा प्यारा भाई हो, उसे कभी