माँ की चप्पल

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रवि एक साधारण लड़का था, मध्यमवर्गीय परिवार से। उसके पापा का देहांत तब हो गया था जब वह छोटा ही था। घर की सारी ज़िम्मेदारी उसकी माँ के कंधों पर आ गई थी। माँ ने कभी थकान का नाम तक नहीं लिया। कभी चौका-बरतन किया, कभी दूसरों के घर सिलाई, और कभी खेतों में काम करके उसने अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया।रवि बड़ा हो गया था, लेकिन समय के साथ उसमें एक आदत घर कर गई थी—गुस्सा। छोटी-सी बात पर चिल्ला पड़ना उसकी आदत बन गई थी। माँ बार-बार समझाती, "बेटा, गुस्सा आग की तरह होता है, इसमें पहले खुद जलते