[4]सिक्किम के किसी अज्ञात पर्वत पर स्थित शिल्प शाला- “येला, तुमने आज के समाचार देखे?”“इतना समय ये पत्थर कहाँ देते हैं मुझे कि मैं समाचार देख सकूँ?” येला ने पत्थर को किसी अज्ञात शिल्प का रूप देते हुए उत्तर दिया। “किन्तु जब पत्थर ही समाचार बन जाए तो?”“क्या? उर्मिला, क्या कह रही हो तुम?”“मैं सत्य कह रही हूँ।”“तो कहो। क्या समाचार है इन पत्थरों के?”“इन पत्थरों के नहीं, उस पत्थर का समाचार है।” उर्मिला ने शिल्प शाला के प्रवेश द्वार पर स्थित एक विशिष्ट शिल्प की तरफ संकेत करते हुए कहा। “वह शिल्प? उसके विषय में कोई समाचार है क्या?”“नहीं येला। समाचार तो