जो कहा नहीं गया - 7

जो कहा नहीं गया – भाग 7(मौन की सीढ़ियाँ)स्थान: प्रयाग से काशी की ओरसमय: उसी रातसंगम की लहरों में ताबीज खोने के बाद रिया कुछ देर किनारे खड़ी रही। हवा में नमी थी, और उस नमी में जैसे कोई अदृश्य स्वर बार-बार उसके कानों में फुसफुसा रहा था — "अगला संकेत… वह नहीं देगा… तुम्हें खुद खोजना होगा।"डायरी उसके हाथ में थी, लेकिन अब उसके पन्नों का रंग पहले से और मटमैला लग रहा था, मानो समय खुद उसकी स्याही को पी रहा हो। उसने पृष्ठ पर अंक "7" को देखा और मन ही मन सोचा — क्या यह कोई