अंत या फिर आरंभ - 1

अंत या फिर आरंभरात का समय था तेज हवाएं चल रही थी बहोत तेज बिजलियाँ कड़क रही थी और तेज बारिश से ऐसा लग रहा था जैसे मानो आज इंद्रदेव अपने रौद्र रूप में हों, इतनी तेज बारिश और तेज हवाओं के बीच एक लड़का पहाड़ी पर खड़ा नीचे खाई की और देख रहा था और आश्चर्य की बात तो ये थी इतनी तेज बारिश और तेज हवाओं के बीच वो लड़का ज्यों का त्यों खड़ा बस नीचे खाई की ओर ही देख रहा था।असल में वो लड़का कोई और नहीं बल्कि अंश था, अंश एक साधारण सा लड़का है