वृंदावन की पावन भूमि, जहाँ हर ओर हरे-भरे वन, कदंब के वृक्ष और यमुना की लहरें कल-कल करती बहती थीं। यह वही स्थान था जहाँ भगवान विष्णु ने अपने अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म लिया। गोकुल और वृंदावन की गलियों में जब बालकृष्ण खेलते थे, तो उनके पीछे बाल-सखा, गोप-गोपियाँ और गायें लगी रहतीं। उनकी हँसी से वातावरण गूंज उठता और उनकी मुरली की धुन सुनकर पक्षी भी चुप हो जाते।इसी वृंदावन में एक और दिव्य आत्मा का जन्म हुआ था – राधा रानी। वे स्वभाव से अत्यंत शांत, कोमल और अलौकिक सौंदर्य से संपन्न थीं। कहते हैं