"रोम, तू यहाँ से चला जा," विनय अंदर आए रोम को रोकते हुए बोला। रोम, विनय, जीद, माहि, साइना और आराध्या तथा आदम, राहुल और उसके कुछ आदमी मंदिर के प्रांगण की दीवार में बने खजाने के द्वार पर खड़े थे। विनय रोम को समझा रहा था। "यहाँ से कहाँ जाऊँ! बाहर भी कालिया के ही लोग हैं और यहाँ मारने वाले भी हैं," रोम मुस्कराते हुए बोला। "तो बाहर कौन है?" विनय बोला। "श्रेय, रोमियो और अभी जो बोला वह," रोम जॉर्ज और श्रेया को नहीं जानता था इसलिए उन्हें अलग संबोधित करता बोला। रोम और विनय को दबाव में डालता आदम अपनी भाषा