आज़ादी का सुख एक गली में कल्लू और भूरी नाम के एक देसी कुत्तों का एक जोड़ा रहता है | उसी गली में विदेशी नस्ल का एक और जोड़ा भी एक बड़े बंगले में रहता है, जिन्हें उनके मालिक प्यार से जैकी और लूसी नाम से बुलाते हैं | कल्लू और भूरी जन्म से ही इसी गली में रह रहे हैं | शुरू से इसी गली में रहने के कारण वे यहाँ के हर परिवार से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं | दोनों की ज़िंदगी परेशानियों से भरी हुई है | उनका गुज़ारा गली के लोगों द्वारा फेंकी गई सूखी रोटियाँ