इश्क और इरादे - 2

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सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर झाँक रही थी, लेकिन शिवम की आँखें मोबाइल स्क्रीन पर टिकी थीं। आज स्कॉलरशिप के परिणाम घोषित होने वाले थे। उसके दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी। उसके लिए यह सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं था, बल्कि उसके और उसके परिवार के भविष्य का फैसला था।घर में भी एक अलग-सा माहौल था। माँ, जो हर रोज़ सुबह जल्दी उठकर चाय बना देती थीं, आज बार-बार शिवम के पास आकर पूछ रही थीं, "बेटा, रिजल्ट आया क्या?"शिवम सिर हिलाकर फिर से फोन की स्क्रीन पर देखने लगा। पिता, मनोहर भाई, चुपचाप अख़बार