(भाग-15) लगभग एक हफ्ते में अपना काम निपटाकर मैं चला आया। हालांकि उस एक हफ्ते की रातें भी मैंने उसी के यहां उसी के बेड पर हम बिस्तर होते गुजारीं। राम जाने उन दिनों मुझमें कहां से इतनी शक्ति आ गई थी कि मैं उसे भरपूर सेक्स का आनंद देता रहा...। पर उस उत्तेजक श्रम के पीछे एक शुभ निर्माण की महती मंशा छुपी थी। क्षमा तो उसी लालसा के तहत रोज हम बिस्तर हो रही थी। क्योंकि वह अपनी रिक्ति को भरना चाहती थी। अपनी संतान की स्वयं अधपति होने की चाह ने ही उसे इस बेमेल सेक्स के